वह रोने लगी- अब्बू बस करो.
पर मैं इतने साल का भूखा मर्द था तो मैंने अपनी शिफा बेटी को खूब चोदा.
उसकी आंखों से आंसू आने लगे, वह तड़पने लगी.
वह चलने लायक न बची तो मैंने उसे अपनी गोद में उठाया और बेडरूम में लेकर आया.
उस रात मैंने अपनी बेटी शिफा की चूत को 4 बार चोदा.
उस दिन के बाद से एक साल तक न जाने कितनी दफा मैं उसकी चूत को चोद चुका हूँ.
मैं बार बार उसे सच बताने की सोचता लेकिन रह जाता कि कहीं शिफ़ा मेरे हाथ से न निकल जाए.
अब हम बाप-बेटी एक-दूसरे के जिस्म की भूख मिटाते रहते हैं.
जब मन चाहता है, मैं अपनी बेटी शिफा की चूत से जंग लड़ने लगता हूँ.
फिर एक दिन वही हुआ, जो मैं चाहता था.
मेरी बेटी मेरे बीज से हमल से रह गई.
अब मामला जग जाहिर होने की स्थिति आ गई थी.
शिफ़ा ने कहा- अब्बू, हम लोग बिजनौर छोड़ कर कहीं और चलते हैं. मैं आपसे निकाह कर लूँगी और इस बच्चे को जन्म दूँगी.
मैं झट से मान गया और आखिर मैंने उससे कह ही दिया- शिफ़ा, तुम मेरे बीज से जाई औलाद नहीं हो, तुम्हारी अम्मी ने किसी दूसरे से तुमको अपने हमल में लिया था.
यह सुनते ही वह रो पड़ी और मेरे सीने से लग गई.
फिर मैंने उसे अपनी पैदाइश के बारे में भी बताया- मैं भी हराम की औलाद हूँ. मुझे भी अपने बाप का नाम नहीं मालूम है.
शिफ़ा बोली- शायद रब को हम पर दया आ गई और वह नहीं चाहता था कि हमारी औलाद हरामी कहलाए. इसलिए हम दोनों निकाह करके इस बच्चे को अम्मी अब्बू का नाम देंगे.
मैं राजी हो गया था.
उसी रात मैं शिफ़ा को लेकर निकल गया और महाराष्ट्र के एक गांव में आ गया.
उधर सब कुछ सैट करके मैं वापस आया और उसी रात अपना किराए वाला घर खाली कर दिया और सामान आदि लेकर अपने महाराष्ट्र वाले गांव में आ गया.
इधर हम दोनों ने निकाह कर लिया और अब औलाद के जन्म लेने का इंतजार कर रहे हैं.
मुझे उम्मीद है कि आपको ये यंग गर्म लड़की की चुदाई पसंद आई होगी.